Anmol

अनमोल

इतने दिल से बनया तिनका जोड कर

जान डाल दी खुद को तोड़ कर

जो बना वह किसे करिश्मे से कम न था

देखने वाले ने भी कहा अरे वाह

नज़रों में इतना आया की नज़र लग गयी

चमक उसकी कुछ लोगो को चुभ गयी

छिनने से भिखरने तक कोई कमी न छोड़ी

छीनने के बाद आपस में ही लड़ने लगे

कहने लगे मेरा है मेरा है 
और खीच तान में टूट गया

बिखर के भी हर तिनके में 
जो चमक आई मेरी थी

वह कल भी मेरा था और अनमोल था

वह आज भी मेरा है 
टूट कर भी बेजोड़ है

उसमे जो खून पसीना बहा 
वो असली है

तभी तो उसका हर अक्स सुनेहरा है

चुभता तुम्हारी आँखों में की 
यह इसके पास क्यों है

छीना तुमने तो संभाल नहीं पाये 
क्यूंकि उसकी जान जो 
कही और बस्ती थी

बिखेर के टुकड़े कमाने चाहे 
तो तुम्हे लहूलुहान कर गया

उसमे मेरे दिल और आत्मा का 
एक हिस्सा बसता है 
वह टूट के भी मुझे अमर कर गया

Written by Swati Sharma

Copyright 2020 © Swati Sharma and Learning with life. All rights reserved.

Published by Swati Sharma

discovering myself

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